खनिज राजस्व को उपलब्धि बताकर संसाधनों की लूट और अंधाधुंध जंगल कटाई को छुपाना चाहती है सरकार -कांग्रेस

रायपुर/04 अप्रैल 2026। खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत वृद्धि के सरकारी दावे को चंद पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए प्राकृतिक संसाधनों की अनियंत्रित और असंतुलित लूट का प्रमाण बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जिस अपराध के लिए इस सरकार को प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए, उसे उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है। मात्र 16625 करोड़ के खनिज राजस्व के लिए पूरा प्रदेश उजाड़ दिया गया, इसके एवज में लाखों करोड़ के बहुमूल्य खनिज और सैकड़ों साल में समृद्ध हुए जंगलों की आहुति दे दी गई है। हसदेव, तमनार, धमजयगढ़, रायगढ़, मैनपाट, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल कांकेर, बस्तर और बीजापुर में हजारों एकड़ में फैले सघन जंगलों को बर्बाद कर दिया गया। अडानी, आर्सेलर मित्तल, रूंगटा और सागर स्टोन जैसे निजी कंपनी नए-नए खदाने खोल कर बहुमूल्य खनिज कौड़ियों के दाम पर उत्खनन कर रहे और बाहर के राज्यों में संचालित कारखानों में बड़े मुनाफे पर भेज रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जंगल, जमीन, खनिज, नदियों हमारी बर्बाद हो रही है और मुनाफा भाजपा के चहेते चंद बाहरी पूंजीपति कमा रहे हैं? बैलाडीला के आयरनओर को शबरी नदी के पानी में घोलकर स्लरी पाइपलाइन के जरिए आंध्र प्रदेश के निजी स्टील प्लांट में भेज जा रहा है, खनिज राजस्व तो मामूली हिस्सा है, असल लाभ में राज्यांश, अंतिम उत्पादों पर कर राजस्व और रोजगार के अवसर भी छत्तीसगढ़ को उपलब्ध नहीं हो रहे, इसके विपरीत औद्योगिक अपशिष्ट से हमारे नदियों और नालों का पानी दूषित हो रहा है, जमीनें बंजर हो रही है लेकिन सरकार केवल पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए काम कर रही है। असलियत यह है कि सेंट्रल इंडिया का फेफड़ा कहलाने वाला छत्तीसगढ़ प्रदेश आज गंभीर पर्यावरण संकट के मुहाने पर खड़ा है, औद्योगिक अपशिष्ट और सार्वजनिक उपक्रमों और नवरत्न कंपनियों में भी खनन का काम भाजपा के चहेते उद्योगपतियों को दबाव पूर्वक दे दिया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इसी षडयंत्र पर अमल करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने कमर्शियल माइनिंग शुरू की, कोल बेयरिंग एक्ट में संशोधन किया, वन अधिकार अधिनियम में आदिवासी हितों के खिलाफ परिवर्तन किया गया। भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ के संसाधनों को लूटने की होड मची है, पेसा कानून के प्रावधान ताक पर रख दिए गए हैं, सीमित और संतुलित दोहन के तय मापदंड दरकिनार कर दिए गए हैं, सारी सीमाएं टूट चुकी हैं। जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत के आसपास थी वह अब लगभग दोगुनी से अधिक हो चुकी है। यह वृद्धि भाजपा सरकार द्वारा अपनाए गए कॉर्पोरेट परस्त, पूंजीवादी नीतियों का ही परिणाम है।

इस सरकार को छत्तीसगढ़ के भविष्य, लोगो के स्वास्थ्य और संतुलित औद्योगिक विकास से कोई सरोकार नहीं यह सरकार अंग्रेजों के समान हर कीमत पर केवल तेजी से संसाधन लूटना चाहती है। यदि छत्तीसगढ़ में खनिज आधारित इकाइयां स्थापित होती या छत्तीसगढ़ में खनिज उत्खन के लिए यहीं पर प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने का प्रयास होता तो सीमित और संतुलित उत्खनन में ही अधिक राजस्व प्राप्तियां भी होती और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलते लेकिन इस सरकार की भूख तो कॉर्पोरेट का तात्कालिक लाभ है।