रानी दुर्गावती के दिखाए मार्ग से जनजातियों के विकास का नया अध्याय लिख रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती ने प्रजा के सुख को ही अपना धर्म माना था। उनका शासनकाल कृषि, जल प्रबंधन और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। यह रानी दुर्गावती की प्रशासनिक दक्षता का ही कमाल था कि गोंड साम्राज्य के हजारों गांव समृद्धि का केंद्र बन गए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती अदम्य साहस, अटल स्वाभिमान और शक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने जीवनकाल में 52 युद्ध लड़े और 51 में विजय प्राप्त की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती के दिखाए मार्ग पर चलकर हमारी सरकार प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण और विकास का एक नया अध्याय लिख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खंडवा जिले के हरसूद के ग्राम छनेरा में हुए वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती उत्सव एवं तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण तथा पंच कलश के जरिये गोपूजन एवं बड़ादेव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार गोंडवाना साम्राज्य के तत्कालीन 52 गढ़ों के राजशासकों के वर्तमान वंशजों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन राजवंशजों को साफा पहनाकर तथा खड्ग एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां खंडवा जिले के साथ बुरहानपुर, बड़वानी, खरगौन, देवास और हरदा के 3 लाख 54 हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21 करोड़ 34 लाख रुपए से अधिक की बोनस राशि का वितरण किया। इसमें खंडवा के 32 हजार 846 तेंदूपत्ता संग्राहक भी शामिल हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खंडवा वन मंडल क्षेत्र की 56 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के 26 हजार 400 से अधिक हितग्राहियों को 4 करोड़ 58 लाख रुपए के काष्ठ लाभांश की राशि भी वितरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खंडवा जिले में लगभग 143 करोड़ रुपए की लागत से 18 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमे लगभग 48 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न हाई स्कूल भवनों और छात्रावासों के साथ लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से खालवा में खेल परिसर का भूमि-पूजन के साथ ही 68 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत से 3 सामुदायिक एवं सांस्कृतिक भवनों की सौगात भी शामिल है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर क्षेत्रीय विकास एवं सुविधा उन्नयन से जुड़ी विभिन्न घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 5 साल में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। इसी उद्देश्य से हरसूद विधानसभा क्षेत्र में करवानी उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां के जनजातीय क्षेत्रों में 25 करोड़ की लागत से बिजली आपूर्ति से जुड़े सभी विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि खालवा तहसील क्षेत्र में 6 सांदीपनि विद्यालय बनाए जायेंगे।

हरसूद में 490 सीटर नया कन्या छात्रावास बनेगा। इस क्षेत्र के सभी छात्रावासों में 34 करोड़ की लागत से रोटी मेकर मशीनें लगाई जायेंगी। छात्रावासों में वॉटर कूलर लगाए जाएंगे। यहां के छात्रावासों में ई-लाइब्रेरी बनाई जायेगी। करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास बनाये जायेंगे। यहां के आश्रम स्कूलों को विकास कार्यों के लिए 143 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। खंडवा में 10 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से एक हाइटेक नर्सरी बनाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हरसूद सहित खंडवा जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनाये जायेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार विरासत से विकास के संकल्प से साथ गरीब से गरीब के जीवन में रोशनी लाने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पंख लगाने का काम किया है। वीरांगना रानी दुर्गावती के जन्मोत्सव पर आज 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान कर जीवन धन्य हो गया।

उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती के जीवन से हमें राष्ट्र प्रथम, स्वाभिमान, विषम परिस्थितियों में नेतृत्व कौशल, नारी शक्ति का सम्मान, जल संचय, जंगल और प्रकृति के संरक्षण की सीख मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत को सम्मान देते हुए सरकार ने प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक 750 रुपये से बढ़ाकर 4 हजार रुपये किया है तथा शुद्ध लाभ का 75 प्रतिशत बोनस के रूप में दिया जा रहा है। आज खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, देवास और हरदा सहित कुल 6 जिलों के 3 लाख 54 हजार 126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस राशि दी गई है।

उन्होंने कहा कि 32 लघु वनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर वनवासियों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए गरीब बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप वितरित किए गए हैं। शासकीय स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क किताबें और साइकिलें दी गई हैं। प्रदेश के 85 हजार युवाओं को शासकीय पदों पर नौकरी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी साल राज्य में 1 लाख करोड़ रूपए की लागत से जनकल्याण और विकास के काम कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश के गांव-गांव तक मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों को भी सुगम परिवहन की बसों का लाभ मिलेगा। प्रदेश में कानून का राज है। राज्य सरकार ने बालाघाट और मंडला जिले से नक्सलवाद की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों में ग्रामीण आबादी को नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ दिया जा रहा है।

किसानों की समृद्धि के लिए दिन में भी 10 घंटे बिजली देने की शुरुआत की जा रही है। कृषक कल्याण वर्ष में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित कर अन्नदाताओं को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर धाम को पीएमश्री हेली सेवा से जोड़ा गया है। प्रदेश में गरीब जरूरतमंदों को एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिल रही है। राहवीर योजना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास ऊइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर है। आज वीरांगना रानी दुर्गावती जन्मोत्सव में 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान किया गया है। पहली बार हमें इतिहास का सिंहावलोकन करने का अवसर मिला है। देश में 2014 के बाद बड़ा बदलाव आया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देशवासियों ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना देखा है। मध्यप्रदेश में 2003 से पहले और उसके बाद विकास स्पष्ट रूप से नजर आता है। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री ऊइके ने रानी दुर्गावती के जीवन पर केंद्रित एक स्वलिखित गीत भी प्रस्तुत किया।

जनजातीय कार्य, लोक सम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय राजवंशों के 52 गढ़ केवल मध्यप्रदेश और देश के दूसरे राज्यों में भी थे। आजादी के बाद उन्होंने देश की एकता के लिए अपना राज्य समर्पित कर दिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जनजातीय युवाओं के कल्याण के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपए की राशि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में दी जा रही है। जनजातीय युवाओं को डॉक्टर बनाने के लिए राज्य सरकार हर साल 90 लाख रुपए फीस भर रही है। प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप बांटे गए हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के मंच पर रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, क्रांतिसूर्य टंट्या मामा, संत सिंगाजी महाराज महापुरुषों के जीवन पर आधारित आकर्षक नृत्य नाटकों का मंचन किया गया।

वीरांगना रानी दुर्गावती के बारे में

रानी दुर्गावती का जन्म अब से 502 साल पहले 5 अक्टूबर 1524 को वर्तमान उत्तरप्रदेश के महोबा में हुआ था। वे गढ़ मंडला राज्य की शासक महारानी थीं तथा साहस, शौर्य, पराक्रम और स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने गोंडवाना साम्राज्य और राष्ट्र के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मुगलों से वीरतापूर्वक संघर्ष किया। प्राणांत तक मातृभूमि की अस्मिता की रक्षा करते हुए 24 जून 1564 को वर्तमान मध्यप्रदेश के जबलपुर में वीरगति प्राप्त की।

52 गढ़ों के इन राजवंशजों का किया सम्मान

कार्यक्रम में श्री महेंद्र प्रताप सिंह जूदेव (नर्मदापुरम), श्री महेंद्र शाह (बरहेटा नरसिंहपुर), डॉ. हेमराज सिंह (जागीरदेवरी रायसेन), श्री अमरजीत सिंह (उदयपुरा रायसेन), श्रीमती रंजना सिंह (मदनपुर नरसिंहपुर), श्रीमती दमयंती सिंह (दियागढ़ जबलपुर), श्री यशवंत सिंह जूदेव (बिलोनिया नरसिंहपुर), श्री विमलेश ठाकुर (दमोह), श्री राजा वीरेंद्र शाह (देवगढ़ छिंदवाड़ा), डॉ. योगेश्वर सिंह (सिहोरा बघेलगढ़), श्रीमती गरिमा सिंह (मदनपुर), श्रीमती अर्चना सिंह कसदे (उमरिया), श्री अभिजीत शाह (हरदा), श्री ठाकुर (गोटेगांव नरसिंहपुर) तथा अन्य गढ़ों से आए राजवंशजों का भी सम्मान हुआ।

कार्यक्रम में विधायक श्री नारायण पटेल, सुश्री कंचन तनवे, सुश्री छाया मौरे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी सुदेश वानखेड़े, महापौर सुश्री अमृत अमर यादव, पूर्व महापौर श्रीमती भावना शाह, कुंवर दिव्यादित्य शाह एवं श्री अंबाराम कराड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक उपस्थित थे।