विपक्ष की निंदा के लिए विशेष सत्र जनता के धन की बर्बादी – दीपक बैज

रायपुर/25 अप्रैल 2026। सिर्फ विपक्ष की निंदा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना जनता के धन की बर्बादी है, यह भाजपा के अलोकतांत्रिक चरित्र को भी दर्शाता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि विधानसभा के एक दिन के सत्र पर लाखों रू. खर्च होगा तथा सैकड़ों मानव कार्यदिवस की बर्बादी होगी। इस सत्र को बुलाने के लिए सरकार के पास कोई ठोस कारण भी नहीं है, सरकार के पास कोई महत्वपूर्ण विधेयक भी नहीं है और न ही कोई ऐसा राज्य के हित का विषय है जिस पर चर्चा कराने के लिए विधानसभा के विशेष सत्र को आहूत करने की जरूरत थी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि हम विपक्ष कांग्रेस की निंदा करने विधानसभा का विशेष सत्र बुलायेंगे। मतलब विपक्ष की निंदा के अलावा मुख्यमंत्री के पास इस सत्र को बुलाने का कोई और कारण नहीं था। विशेष सत्र बुलाना है तो अपनी नाकामियों पर चर्चा कर ले, मोदी की गारंटी फेल होने पर चर्चा कर ले।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिस विषय पर सरकार विपक्ष की निंदा करना चाहता है उस पर संसद में तीन दिनों तक चर्चा हो चुकी है। संसद ने उस विषय पर चर्चा के बाद मतदान में खारिज भी कर दिया है। जो विधेयक संसद की संपत्ति है जिस पर संसद में चर्चा हो चुकी है उस पर विधानसभा चर्चा कैसे कर सकती है? संसद में सांसदों ने अपने विवेक अनुसार मतदान किया, अब उस मतदान के आधार पर विधानसभा में निंदा प्रस्ताव लाया जाना संसद की अवमानना के साथ सांसद के विशेषाधिकार पर भी सवाल खड़ा किया जाना है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले ढाई साल में सरकार के पास जनहित का कोई एक भी मुद्दा नहीं था जिस पर वह विशेष सत्र बुलाती। विशेष सत्र बुलाया भी तो स्तरहीन राजनीति करने के लिए। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि विशेष सत्र का पूरा खर्च भाजपा से वसूला जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा को निंदा प्रस्ताव लाना है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ और केन्द्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ले आये। भाजपा एक ऐसा विधेयक जो संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है तथा जिस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिया तथा वह कानून का रूप ले चुका है। उस पर झूठ बोल कर भ्रम फैला रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लागू नहीं करने के लिये मुख्यमंत्री मोदी की दुर्भावना के लिये निंदा प्रस्ताव ले आये।